mg world vision: उत्तराखंड के उदखंडा गाँव के दस परिवार के लोगो ने आत्मनिर्भरता का अनुठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने वीरान गांव को फिर से आबाद कर दिया।

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Sunday, October 25, 2020

उत्तराखंड के उदखंडा गाँव के दस परिवार के लोगो ने आत्मनिर्भरता का अनुठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने वीरान गांव को फिर से आबाद कर दिया।


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उत्तराखंड के उदखंडा गाँव के विकास और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी।

many villagers of Uttarakhand started animal farming of goats
many villagers of Uttarakhand started animal farming of goats.

 


यह शुरू हुआ सन 2017 में।

    उत्तराखंड राज्य के चिपको और बीज बचाओ आंदोलन के लिए प्रख्यात टिहरी गढ़वाल जिला मे बसा हुआ उदखंडा गाँव ऊंचे पहाड़ो से घिरा हुआ है। इस गाँव के लोगो ने आत्मनिर्भरता का एक नायाब द्रष्टांत प्रस्तुत किया है। उत्तराखंड के अन्य गाँव वासियो को इसका अनुकरण करना चाहिए। सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं समग्र भारत देश के ऐसे गाँव जो वीरान होते चले जा रहे है उनके लिए भी यह एक अनुकरणीय द्रष्टांत है ।

Udkhanda village of Uttarakhand state is surrounded by high mountains.
Udkhanda village of Uttarakhand state is surrounded by high mountains.

बंजर जमीन के कारण यह गाँव धीरे धीरे खाली होता गया

    कुछ वर्ष पहले उदखंडा गाँव मे करीब 140 परिवार बसे हुए थे। लेकिन बंजर जमीन के कारण यह गाँव धीरे धीरे खाली होता गया । सिर्फ 10 परिवार ही गाँव मे अकेले रह गये जो किसी भी हाल में अपना गाँव छोड़ना नही चाहते थे। इन परिवार के लोगो ने हामी भर कर फिर से गाँव को आबाद करने का फैसला किया।
barren huts uttarakhand-village
barren huts uttarakhand-village.


एक सहकारी मण्डल बनाया

    गाँव के मुखियाँ विनोद कोठियाल के मार्गदर्शन से गाँव वालो ने पांच लाख का चंदा इकट्ठा कर के एक सहकारी मण्डल बनाया जिसका नाम रखा: 'हेवल घाटी कृषि विकास स्वायत्त सहकारी समूह'


जमीन बंजर होने का कारण

    कभी यह जमीन फलद्रूप थी। अच्छी नगदी फसल की उपज थी और पशुपालन भी जोरों से चल रहा था। हेवल नदी का जल स्तर कम होने लगा तो जमीन उजड़ती गई, जिसका बुरा प्रभाव खेती और पशुपालन पर  हुआ। लोग रोजगारी के लिए गाँव छोड़ने लगे। हेवल और दूसरी कई छोटी छोटी नदियां जो गंगा या जमना जैसी बड़ी नदी से मिलती है उनका जल स्तर सन 2014 से कम होता जा रहा है और यह डर है की यह नदियां लुप्त हो जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा बंजर हो जाएगा। इन नदियो को फिर से सदानीरा करना जरूरी है।
water level of the small rivers of Uttarakhad are decreasing
water level of the small rivers of Uttarakhad are decreasing.

 

सामुहिक खेती का प्रयोग

    सामुहिक खेती के प्रयोग के अंतर्गत इन्हों ने बंजर जमीन को खेती लायक बनायी, आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग किया और उस जमीन पर आदु तथा मटर की खेती का प्रयोग किया, जो सफल हुआ। इस खेती से नव लाख रुपे का मुनाफा हुआ जो गाँव वालो ने बराबर हिस्से मे बांट लिया। सामुहिक खेती के प्रयोग की सफलता के बारे मे मालुम होने पर गाँव छोड़ कर गये परिवार धीरे धीरे लौटने लगे। कुछ परिवार ने बकरी पालन के लिए फार्म भी बनाये।
villagers of udkanda adopted the cooperative farming to develop the land
villagers of udkanda adopted the cooperative farming to develop the land


the idea of selling the processed product proved more profitable for the villagers of Udkhanda.
the idea of selling
the processed product
proved more profitable
for the villagers
of Udkhanda.

मार्केटिंग का फंडा सफल हुआ 

    गाँव के लोगो ने निश्चय किया की खेती की उपज का कच्चा माल सीधा बाजार में नहीं बेचेंगे किन्तु उस पर प्रोसेस कर के फिनिश माल की एक ब्रांड बना कर बिक्री करेंगे। इनका यह प्रयोग बहुत सफल सिद्ध हुआ और वे तगड़ा मुनाफा कमाने लगे। धीरे धीरे गाँव के सभी लोग वापस आ गये, अपने घर को फिर से मरामत करवायी और गाँव फिर से बस गया। गाँव के लिए सरकार ने नयी सड़क भी बना दी। हालांकि इसके लिए गाँव वालो को आंदोलन करना पड़ा। कई युवानों को रोजगारी मिली हुई। आज यह गाँव उत्तराखंड का एक मॉडल आदर्श गाँव बन गया है और दूसरे वीरान होते जा रहे गाँव को आबाद रखने का एक सफल रास्ता दिखाया है।

 


कोठियाल परिवार के सदस्यो की सेवा और मार्गदर्शन

    गाँव के मुखी है विनोद कोठियाल और अन्य कोठियाल परिवार से एक निवृत सिंचाई अधिकारी बी आर कोठियाल है। दूसरे निवृत पुलिस अधिकारी हृषिरम कोठियाल है। यह लोग भी अपनी सेवा का लाभ यह संस्था को दे रहे है। ऋतमणि कोठियाल बकरा पालन के फार्म की देखभाल करते है।
उदखंडा गाँव ने इस समस्या का एक सटीक उपाय सुझाया है।
आजकल गाँव खाली होते जा रहे है, लोग कृषि और पशुपालन से दूर होते जा रहे है और शहरो मे धारावी जैसी बस्ती मे रहने के लिए मजबुर होते जा रहे है। यह समस्या न सिर्फ उत्तराखंड की किन्तु भारत देश के सभी गाँव की है। उदखंडा गाँव ने इस समस्या का एक सटीक उपाय सुझाया है।

  ||अस्तु||

Writre of this post is MG Dumasia, blogger and admin of this blog.

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